शनिवार 2 मई 2026 - 05:52
हरम इमाम रज़ा (अ) की दरगाह दुखी दिलों की पनाहगाह

पैग़म्बर-ए-अकरम (स) ने इमाम रज़ा (अ) की ज़ियारत के असर के बारे में इशारा किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी 'हौज़ा' निम्नलिखित रिवायत "ओयून अख़बार अर रज़ा" किताब से लीग गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:

رسول خدا صلی الله علیه و آله و سلم:
سَتُدْفَنُ بَضْعَهٌ مِنِّی بِأَرْضِ خُرَاسَانَ مَا زَارَهَا مَکْرُوبٌ إِلاَّ نَفَّسَ اَللَّهُ کُرْبَتَهُ وَ لاَ مُذْنِبٌ إِلاَّ غَفَرَ اَللَّهُ ذُنُوبَهُ

पैग़म्बर ए अकरम (स) ने फ़रमाया:

मेरे शरीर का एक टुकड़ा (हिस्सा) ख़ुरासान की धरती में दफन किया जाएगा; उस (मज़ार) की कोई भी दुखी, परेशान व्यक्ति ज़ियारत नहीं करता, मगर अल्लाह उसकी परेशानी को दूर कर देता है; और न ही कोई गुनाहगार उसकी ज़ियारत करता है, मगर अल्लाह उसके गुनाहों को माफ कर देता है।

ओयून अख़बार अर रज़ा, भाग 2, पेज 257

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